Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 45, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 45, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
कोशः सकलसौख्यानां शीतलालोककारकः ।
शैलाभोऽमृतपिण्डाभो मज्जाआत्मफलस्थितेः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
यह बिल्वफल सम्पूर्णं सुखो का मानों एक निधि हे, शीतल
प्रकाश देनेवाला है, पर्वत के समान शोभा से युक्त है, अमृत के गोले की कांति धारण करता है और
आत्मा के कर्मफलों की स्थिति का यानी मनुष्य के आनन्द से लेकर हिरण्यगर्भ के आनन्दपर्यन्त (८)
कर्मफलं की स्थिति का सारभूत पदार्थ है