Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 45, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 45, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

अनन्तकलनातत्त्वपरिपल्लविता हरेः । हृदब्जकर्णिका चेयं लोकपद्माक्षमालिका ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

यही चितिशक्ति अनन्त रचनाओं के रहस्यों से चारों ओर पल्लवित नारायण का हृदय-कमल ओर लोकरूपी कमलगट्टों की माला का छत्ता हे