Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 45, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 45, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
इदमन्तःस्थितानल्पकल्पनाम्भोरुहालयम् ।
ब्रह्माण्डमण्डपापीडक्रीडामण्डपमण्डलम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी ब्रह्य मेँ कल्पनारूपी कमलों के आश्रय अनन्त जीव भीतर अवस्थित हैं,
यही ब्रह्माण्ड-मण्डप का ऊपर का शिखाभूषण है ओर उसकी क्रीडा के मण्डप का मण्डल है