Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 45, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 45, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
अयं पुरः पार्श्वतोऽयं पश्चादाराद्दवीयसी ।
इदं भूतं वर्तमानं भविष्यत्त्विदमित्यपि ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
यही चितिशक्तिस्वरूप आत्मा आगे हे, यही दोनों
ओर यानी दायें - वाये, पीठे, समीप और दूरतर है । यही ब्रह्मभूत एवं वर्तमान वस्तुरूप है ओर यही
भविष्यत् भी हे