Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 45, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 45, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

इयं त्वत्ता त्वियं मत्ता तत्तेयं संस्थिता स्वयम् । ब्रह्माण्डौघोऽयमूर्ध्वस्थः स्वयमङ्गोर्ध्वमप्यधः ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

यही चितिशक्ति त्वत्ता यानी त्वद्रूप है, यही 'मत्ता' यानी अहंरूप है ओर यही स्वयं "तत्ता" रूप अर्थात्‌ ब्रह्मरूप होकर स्थित है । हे श्रीरामजी, यही चितिशक्तिस्वरूप आत्मा ऊपर के ब्रह्माण्डों का समूह है और स्वयं यह ऊपर तथा नीचे भी स्थित है