Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 46, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 46, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
अधोमुखान्यूर्ध्वमुखान्यपि तिर्यङ्मुखानि च ।
मिथोमिलितमूलानि मिथःप्रोतमुखान्यपि ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
उनमें कुछ नीचे मुँहवाले हैं, कुछ ऊर्ध्वमुखवाले भी हैं और कुछ तिरे मुँहवाले भी हे । कुछ परस्पर मिले
हुए मूलों से युक्त हैं तो कुछ परस्पर गुँथे मुँहवाले भी हैं