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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 46, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 46, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

तेषां च निकटे सन्ति शङ्खाः शतसहस्रशः । चक्रौघाश्च महाकाराः पद्मवत्संनिवेशिनः ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

ओर उन्हीं कमलों के समीप सैकड़ों-हजारों कमल-मुकुल के समान आकृतिवाले महाकार शंख हैं तथा विकसित कमल की नाईं आकृतिवाले बड़े बड़े चक्रसमूह भी हैं