Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 46, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 46, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
उक्त्या संपद्यते यच्च तल्लयेन विलीयते ।
ब्रह्मैवेदं विकारादि विकाराद्यर्थवर्जितम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
ये भुवन आदि विकार विकारादि
अर्थो से शून्य ब्रह्मरूप ही हैं । विषयों का ग्रहण और अग्रहण भी ब्रह्मरूप ही है, क्योकि ब्रह्म अनन्त
है