Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 46, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 46, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
नेदं कदाचित्क्रियते न कदाचन नश्यति ।
अद्रिवत्प्रभवोल्लासविलासावेदनात्मकम् ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
वस्तुतः पर्वतकूट की नाई उत्पत्ति,
उल्लास एवं विलास रूप विकारों को प्राप्त न करनेवाला ब्रह्म का स्वरूपभूत यह जगत् न कभी किसी
से किया गया है यानी उत्पादित है और न कभी नष्ट ही होता है