Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 46, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 46, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
अत्रेमामिन्दुवदन चित्रां विस्मयकारिणीम् ।
वर्ण्यमानां मया रम्यामन्यामाख्यायिकां श्रृणु ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त दृष्टान्त का ही विवरण करने के लिए ब्रह्मशिलाख्यान की भूमिका बाँधते हैं।
चन्द्र से बढ़कर आह्लादकारी मुखवाले हे श्रीरामजी, इस प्रसंग में कभी न सुनी गयी, अतएव
आश्चर्यजनक, रमणीय और अन्य दूसरी इस आख्यायिका का (ब्रह्मशिलाख्यायिका का), जिसका
अभी आगे मैं वर्णन करूँगा, आप (सावधान होकर) श्रवण कीजिए