Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 47, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 47, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
यत्सौक्ष्म्येऽपि हि सारात्म स्थौल्ये सारतरं हि तत् ।
यथा रसात्मिका शक्तिः परमाणुतयाऽनघ ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
इसीलिए जल-परमाणुगत रसशक्ति जिस प्रकार स्थूल- जल में परत्यक्षगोचर होती है, उसी प्रकार
घट आदि मे ब्रह्म-सत्ता भी प्रत्यक्षगोचर होती है, यह कहते है।
हे पापशून्य श्रीरामजी, परमाणुरूप से विद्यमान रसस्वरूपा जलशक्ति स्थूल जल में स्थित
होकर जैसे प्रत्यक्ष विषय होती है, वैसे ही जगत् के स्थूलपदार्थो में स्थित होकर ब्रह्मशक्ति भी
प्रत्यक्ष विषय होती है