Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 48, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 48, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 48 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
तथात्मा ह्लादयत्यन्तर्दृश्यदर्शनसंगमे ।
बिम्बाद्दूरं प्रयातस्य भित्तावपतितस्य च ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
उन महात्माओं का भीतरी स्वरूपद्ुख तो युतां विक्षेपरहित है, इस विषय में भी दृष्टान्त
बतलाते हैं ।
चन्द्ररूप विम्ब से दूर तक फैली हुई तथा दीवार में अपतित, शुद्ध आकाश प्रदेश में रहनेवाली चन्द्रमा
की ज्योत्स्ना का जो रूप है, वही परमात्मा के विक्षेपरहित आह्लाद का रूप है, उपर्युक्त योगी महात्मा उसी
रूप का अनुभव करते हैं