Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 49, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
ब्रह्मतत्त्वमिदं सर्वमासीदस्ति भविष्यति ।
निर्विकारमनाद्यन्तं नाविद्यास्तीति निश्चयः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
हम ब्रह्म में अविद्या का सद्भाव ज्ञानियों की दृष्टि से नहीं कहते, कितु अज्ञानियो को ज्ञानी बनाने
के लिए केवल कल्पना से वैसा कहते हैं, इस अभिप्राय से महाराज वस्िष्ठजी उत्तर देते हैं।
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामचन्द्रजी, विकाररहित, आदि और अंत से शून्य यह पूर्ण ब्रह्मतत्त्व
पहले था, इस समय है ओर आगे चलकर भी रहेगा । अविद्या का तनिक भी अस्तित्व नहीं है, यह मेरा
दृढ़ निश्चय है