Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 49, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
एतावन्तमबुद्धस्त्वमभूः कालं रघूद्वह ।
कल्पिताभिः किलैताभिर्बोधितोसि स्वयुक्तिभिः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
वह तो आपकी अज्ञानता-दशा में आपकी बुद्धि के अनुसार कल्पना से मैंने कहा था अव तो आप
भलरीभाँति प्रबुद्ध हो चुके हैं, इसलिए उस प्रकार की कल्पना करने का अव अवसर ही नहीं रहा; अतः
पूर्वापर में कोई विरोध नहीं है, यह कहते हैं ।
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे रघूद्रह, इतने काल तक आप अज्ञानी होकर स्थित थे । अब तो
कल्पित इन अपनी युक््तियों से ही आप प्रबुद्ध हो चुके हैं