Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 49, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
अविद्येयमयं जीव इत्यादिकलनाक्रमः ।
अप्रबुद्धप्रबोधाय कल्पितो वाग्विदां वरैः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी, वेदरूप वाणी का
रहस्य जाननेवालों में सर्वश्रेष्ठ विद्वानों ने "यह अविद्या हे ओर यह जीव हे इत्यादि कलना-क्रम की जो
कल्पना कर रक्खी है, वह अज्ञानी जनों को बोध देने के लिए ही है