Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 49, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
अप्रबुद्धं मनो यावत्तावदेव भ्रमं विना ।
न प्रबोधमुपायाति तदाक्रोशशतैरपि ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
जव तक मन प्रबुद्ध नहीं हो
जाता तब तक अविद्या आदि शास्त्रीय व्यवहारो की कल्पना के बिना सैकड़ों आक्रोशो से भी वह प्रबोध
को प्राप्त नहीं होता