Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 49, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
सर्वं ब्रह्मेति यो ब्रूयादप्रबुद्धस्य दुर्मतेः ।
स करोति सुहृद्वृत्त्या स्थाणोर्दुःखनिवेदनम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
दोषों के विद्यमान रहते तत्त्वोपदेश देना व्यर्थ है, इस आशय से कहते हैं।
अज्ञानी दुर्मति के सम्मुख "यह सब कुछ ब्रह्म है" यों जो विद्वान् उपदेश देता है मानों वह अपना मित्र
समझकर एक हूंठे वृक्ष के समक्ष दुःखनिवेदन करता है