Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 49, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
युक्त्या प्रबोध्यते मूढः प्राज्ञस्तत्त्वेन बोध्यते ।
मूढः प्राज्ञत्वमायाति न युक्त्या बोधनं विना ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
मूर्ख युक्ति से प्रबोधित होता हे ओर
प्राज्ञ तत्त्व से युक्ति से बोध कराये बिना मूर्ख प्राज्ञदशा को प्राप्त नहीं होता