Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 49, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
तदनाद्यन्तमाभासं सत्त्वमेव परं पदम् ।
स्थितोऽसि सर्वगैकात्मशुद्धसंविन्मयात्मकः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
सर्वव्यापी, एकरूप, शुद्ध संवित्स्वरूप हुए आप वह श्रुतिप्रसिद्ध, आदि और अन्त से
रहित, प्रकाशात्मक परमपदस्वरूप होकर स्थित हो गये हैं