Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 49, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
निर्ममो निरहंकारो बुद्धिमानसि साधु चेत् ।
तद्ब्रह्म वेदनं शान्तं सर्वभूतस्थितं भव ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीराघव, यदि उत्तम रीति से आप अभिमान से शून्य, ममता
से रहित और बुद्धिमान हैं तो सम्पूर्ण प्राणियों में स्थित, सर्वोपद्रवशून्य, शांत, चिदेकरस ब्रह्मरूप हो
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