Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 49, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
भारूपश्चेतनो व्यापी परमात्माहमित्ययम् ।
राघवानुभवान्तस्त्वं तिष्ठन्गच्छञ्छ्वसन्स्वपन् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीराघव, स्थित हो रहे, जा
रहे, श्वास ले रहे तथा शयन कर रहे आप अपने हृदय में "सर्वव्यापी चैतन्य प्रकाश स्वरूप यह परमात्मा
मैं ही हूँ" ऐसा अनुभव कीजिए