Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 49, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
न संवेद्यं न संवित्तिस्तत्र ब्रह्मणि विद्यते ।
तद्ब्रह्मशब्दकथितं निःसंबन्धचिदात्मवत् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्म मे वैषम्य- संस्पर्श का अभाव दिखलाते है।
उस ब्रह्म मे न तो संवेद्य (विषय) विद्यमान रहता हे और न संवित्त ही विद्यमान रहती है यानी ब्रह्म
में दृश्य-दर्शन का तनिक भी सम्बन्ध नहीं है । सम्बन्धरहित होने पर भी "निःसम्बन्ध", “चिदात्मा”
आदि शब्दों की नाई वह ब्रह्म शब्द से भी कहा गया हे