Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 49, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 49, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
अरूपत्वात्तथैकत्वान्नित्यत्वादयमीश्वरः ।
वशं भावविकाराणां न कदाचन गच्छति ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
नीरूप, एक तथा नित्यस्वरूप होने के कारण यह परब्रह्म परमात्मा भावविकारों
के वश में कभी भी नहीं जाता