Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 5, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 5, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 5 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
आ इदानीं स्मृतं सम्यग्यथैष सकलोऽस्म्यसौ ।
यस्त्वद्वागमृतापूरस्नातेनायमहं स्थितः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
अहा ! आपके अमृतप्रवाहो से स्नान किया यह मैं परमार्थरूप से जिस प्रकार का था, वह सब मैं ही हूँ।
इस प्रकार स्मरण करता हूँ