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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 5, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 5, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 5 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

ते संशयास्ताः कलनाः सर्वमस्तं गतं मम । रात्रिवेतालसंसारः प्रभात इव भास्करे ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

भगवन, मेरे वे संशय, वे सब कल्पनाएँ (भ्रान्तियाँ) उस प्रकार नष्ट हो गई, जिस प्रकार रात्रि मेँ बालक की भ्रान्ति से कल्पित वेताल का संचरण प्रभात का उदय होने पर शान्त हो जाता है