Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 5, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 5, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 5 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
निर्मले हृदि विस्तीर्णे संपन्ने हिमशीतले ।
मनो निर्वृतिमायातं सरसी शरदीव मे ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
हृदय के निर्मल, विस्तीर्ण
ओर हिम की नाई शीतल हो जाने पर, शरतकाल में महान सरोवर के सदुश, मेरा अन्तःकरण विक्षेपवर्जित
सुख को प्राप्त हुआ