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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 50, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 50, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 50 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

कश्चित्कालेन बहुना भुक्तयोनिगणातुरः । आत्मज्ञानवशादेति परमं पदमात्मनः ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

बहुत काल तक अनेक योनियों में प्राप्त सुख-दुःखादि भोगों के अनंतर व्याकुल हुआ कोई पुरुष आत्मज्ञान द्वारा अपना परमपद प्राप्त करता है