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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 50, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 50, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 50 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

लीलयेदं तु पृच्छामि भूयोबोधाभिवृद्धये । बालस्येव पिता ब्रह्मन्न कोपं कर्तुमर्हसि ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मन्‌, बहुत लोगों के ज्ञान की अभिवृद्धि के लिए लीलावश मैं आपसे यह प्रश्न पूछता हू । महाराज, बालक के लीलाप्रश्न में पिता के सदृश आपको क्रोध करना युक्त नहीं हे