Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 50, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 50, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 50 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
पराम्भोधौ तु नास्त्येव देशकालक्रियादिकम् ।
तन्मयैकतया नित्यमात्मा सर्वत्र सर्वगः ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
परमचितिरूप समुद्र में तो देश,
काल, क्रिया आदि सदा एकमात्र तद्रूप होने से पृथक् है ही नहीं । आत्मा सदा सव जगह सबमें रहनेवाला
है