Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 51, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
तस्यास्त उपदेशाय सेयं जीवादिकल्पना ।
कृता शास्त्रैः प्रबोधाय तां त्वमेकमनाः श्रृणु ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामभद्र, आप जैसे अधिकारी जीवों को उपदेश देने के लिए उस अविद्या की ही जीव आदिरूप
कल्पना शास्त्रों ने की हे । इसलिए प्रबोध के लिए एकचित्त होकर आप उसे सुनिए