Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 51, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
अविद्याया विचारोऽयं जीवपुर्यष्टकादिका ।
अप्यत्यन्तमसत्यायाः कल्पना कल्पितात्मनः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, सत्य आत्मा के सन्निधान से अत्यन्त असद्रूप भी
अविद्या की जीव, पुर्यष्टक आदिरूप कल्पना की गई है, यह विचार भी अविद्या से होता है