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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 51, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

यद्यथा भावयत्याशु तत्तथानुभवत्यलम् । सत्यो भवत्वसत्यो वा बालेन निशि यक्षकः ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

रात्रि में बालक द्वारा कल्पित यक्ष की नाई, फिर वह सत्य हो या असत्य ही हो, यह जीवचिति “पंचतन्मात्राओं के पंचीकरणरूप शरीर की कल्पना सत्य ही हे" यों संभावना करती हे