Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 51, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
पञ्चतन्मात्रकलनां संभावयति सत्तया ।
तत्रात्मनि तथा रन्ध्रान्प्रपश्यति तथोदितान् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
ओर उस देहरूप आत्मा में उसी प्रकार उत्पन्न यानी उपर्युक्त दृष्टान्त की नाई उत्पन्न
इन्द्रिय दरारों को भी उस प्रकार देखती है