Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 51, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
विद्धि पुर्यष्टकं जीवो यो गर्भस्थेन्द्रियोदयः ।
यद्यथा भावयत्याशु तत्तथा परिपश्यति ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
गर्भावस्था से लेकर उसीका दिग्दर्शन कराते है ।
श्रीरामचन्द्रजी, जो व्यष्टि-जीव छठे महीने में गर्भ में ही चक्षु आदि इन्द्रियों के प्रादुर्भाव से सम्पन्न
पुर्यष्टकस्वरूप हो जाता है, वह तभी से लेकर जिस व्यवहर्तव्य वस्तु की जिस प्रकार भावना करता है;
उसी प्रकार उसे अपनी भावना से तत्काल ही देखने लगता है, यह आप जानिए