Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 51, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
हेमत्वकटकत्वे द्वे सत्यासत्यस्वरूपिणी ।
हेम्नि भाण्डगते यद्वच्चित्त्वाचित्त्वे तथात्मनि ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
सत्य ओर अमृत के मिथुनीमाव से वाचारम्भण' श्रुति में दर्शित न्याय से दृष्टान्त बतलाते हैं ।
जिस प्रकार भूषण में स्थित सुवर्ण में यानी सुवर्ण के आभूषण में सत्य एवं असत्यरूप सुवर्णत्व और
कटकत्व दोनों रहते हैं, उसी प्रकार आत्मा में भी चित्तत और अचित््व दोनों रहते हैं