Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 51, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
अद्यापूर्वाभिधं स्वप्ने यथा पश्यति नान्यथा ।
अग्रदृष्टं तथैवार्थं चेतनं चित्प्रपश्यति ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
वही चिदात्मा जीव होकर आज अभिनव वर्तमान
विषय को जिस प्रकार चित्स्वभाव होने से ही देखता है, जडस्वभाव होने से नहीं, उसी प्रकार आगे देखे
जानेवाले विषयों को भी देखता हे