Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, Verse 54
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 51, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
कदाचिद्धि सुषुप्तस्थः कदाचित्स्वप्नवत्स्थितः ।
आतिवाहिकदेहोऽयं सर्वस्यैवावतिष्ठते ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, सबकी ही यह आतिवाहिक देह कभी तो सुषुप्तावस्था में स्थित रहती है और कभी स्वप्न की
नाई यानी स्वप्नावस्था में स्थित रहती है