Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, Verse 63
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 51, verse 63 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 63
संस्कृत श्लोक
तामेवान्यतया पश्यन्मुधैव परिशोचति ।
जीवाणोरन्तरे त्वन्यन्न किंचित्परमादृते ॥ ६३ ॥
हिन्दी अर्थ
जीवरूप परमाणु के भीतर तो परम महत् ब्रह्म के सिवा दूसरा कुछ
भी नहीं है, अहो ! जहाँ-तहाँ यह जो जगत् आँखों के सामने आ पड़ा है, वह माया का ही विलास
है