Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 51, Verse 62
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 51, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 51 · श्लोक 62
संस्कृत श्लोक
मिथ्योदितः स्वहृदये स्वस्थ एव शिलीकृते ।
जीवानामन्तरे त्वन्यन्न किंचिच्चित्कलां विना ॥ ६२ ॥
हिन्दी अर्थ
तब क्या जीव के हृदय में वास्तविक भय है ? इस शंका पर नहीं” ऐसा कहते हैं।
जीव के भीतर चितिकला के सिवा और दूसरा कुछ भी नहीं है, वह उसे ही अन्यरूप से देखता हुआ
व्यर्थ में सोच किया करता है