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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 52, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । भविष्यति कदा ब्रह्मन्सोऽर्जुनः पाण्डुनन्दनः । कीदृशीं च हरिस्तस्य कथयिष्यत्यसक्तताम् ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : ब्रह्मन्‌, (कृपाकर आप मुझे बतलाइये कि) वह पाण्डुनन्दन (इस पृथ्वी पर) कब उत्पन्न होगा ओर उसकी अनासक्ति का वर्णन भगवान्‌ श्रीकृष्ण किस तरह करेगे ?