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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 52, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

पाण्डोः पुत्रोऽर्जुनो नाम सुखं जीवितमात्मनः । क्षिपयिष्यति निर्दुःखं तथा क्षेपय जीवितम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

उसके लिए अर्जुनोपाख्यान की भूमिका बधते हैं। श्रीरामचन्द्रजी, अर्जुन नामधारी महाराज पाण्डु का पुत्र जिस तरह जीवन्मुक्तिरूप सुख से युक्त होता हुआ अपना जीवन शीघ्र विता देगा, उसी तरह आप भी दुःखरहित अपना जीवन बिता दीजिए