Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 52, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
तेनेयमुर्वी नीरन्ध्रा भूतैर्मर्त्यैरमृत्युभिः ।
दीना प्रपन्ना गुल्मेव भारभूतैर्भविष्यति ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
उस
व्रतचर्या के कारण यह पृथिवी मृत्युलोक में आये हुए, भारस्वरूप, मृत्युरहित प्राणियों से व्याप्त वन-
गुल्मो से संकीर्ण-सी, अतएव दीन हो जायेगी