Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 52, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
भूभारपरिभूताङ्गी हरिं शरणमेष्यति ।
कान्ता दस्युपराभूता दीना पतिमिव प्रिया ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
उस समय मनुष्यों के भार से परिपीडित अंगोवाली
यह दीन पृथिवी शरण पाने के लिए भगवान् विष्णु के समीप उस तरह आयेगी, जिस तरह लुटेरों से लूटी
गई, अतएव कातर स्त्री अपने पति के समीप आती हे