Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 52, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
हरिर्देहद्वयेनाथ महीमवतरिष्यति ।
देवांशैरखिलैः सार्धं नरनारायणं गतैः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर सम्पूर्णं देवांशं के साथ, जो नर
ओर नारायण के सहायतार्थ उत्पन्न होगे, विष्णुभगवान् दो शरीरो से पृथिवी पर अवतार लेंगे