Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 52, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
वसुदेवसुतस्त्वेको वासुदेव इति श्रुतः ।
देहो भविष्यति हरेर्द्वितीयः पाण्डवोऽर्जुनः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
उनमें एक तो वसुदेव का पुत्र "वासुदेव" इस नाम से विख्यात विष्णु का शरीर होगा ओर दूसरा शरीर
होगा-पाण्डु का पुत्र “अर्जुन इस नाम से विख्यात