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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 52, Verse 31

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 52, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

अन्योन्यं हरतोरुर्वौ तयोः संग्रामलोलयोः । अष्टादशात्राक्षौहिण्यो घटिष्यन्त्यत्र भीषणाः ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

उसका चचेरा भाई “दुर्योधन” नाम से विख्यात होगा । ओर उस दुर्योधन का वैसा ही प्रतिद्वन्द्री योद्धा "भीम" "नामक द्वितीय पाण्डुपुत्र होगा, जैसा सर्पं का प्रतिद्न्द्री नेवला ॥ ३ ०॥ परस्पर पृथ्वी का अपहरण कर रहे, युद्ध करने में तत्पर उन दोनों की भयंकर अठारह अक्षौहिणी सेना कुरुक्षेत्र में होनेवाली महाभारत की लडाई में इकट्ठी होगी