Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 53, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
संन्यस्तसर्वसंकल्पः समः शान्तमना मुनिः ।
संन्यासयोगयुक्तात्मा कुर्वन्मुक्तमतिर्भव ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
अथवा, सर्वसंकल्पत्यागरूपी सन्यास योग में आत्मा को लगा देने से भी तुम्हें कर्मबन्धन की प्रसक्ति
नहीं होगी, यह कहते हैं।
अर्जुन, तुम सभी संकल्पो का त्याग कर चुके, इसलिए अब समस्वरूप, शान्तचित्त मुनि बनकर
कर्मफलत्यागरूपी संन्यासयोग में आत्मा को युक्त करके कर्म कर रहे तुम मुक्त मति हो जाओ