Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 53, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
तत ईषद्यदुत्थानमीषदन्यतयोदितम् ।
स जगत्प्रतिभासोऽयमाकाशमिव शून्यता ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
तादृश्यभाव ब्रह्म से कुछ
दूसरे रूप से उदित जो कुछ थोडा-सा समुत्थान है, वही यह जगत् का प्रतिभास है। और वह गन्धर्वनगर
के आकाश की नाई शून्यस्वरूप ही हे