Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 53, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
इति ज्ञातविभागस्य बुद्धौ तस्य परिक्षयः ।
कर्मणां यः फलत्यागस्तं संन्यासं विदुर्बुधाः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त रीति से विचारकर सार ओर असार के विभाग का ज्ञान प्राप्त कर चुके
पुरुष की बुद्धि में अहं ओर ममता के आग्रह का जो परिक्षय होता है, उसीसे सब फलों में अस्पृहारूप
त्याग अर्थतः सिद्ध हो जाता हे । उसे ही ज्ञानियों ने संन्यास" कहा हे