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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 53, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 53, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 53 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

स्वात्मांशैः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि भागशः । अहंकारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

अंशो के सदुश स्वात्मा के परिच्छेदक होने के कारण अंशरूप देह, इन्द्रिय आदि जो सत्त्वादि गुणों के विकार हैं, एकमात्र उन्हीं से ये सारे कर्मविभागशः किये जाते हे । परंतु अहंकार से विमोहित अन्तःकरणवाला पुरुष “में ही करनेवाला हूँ यों मानता है